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बांग्लादेश: बच्ची से रेप के बाद हत्या कर किए टुकड़े, कोर्ट ने दोषी दंपति को 5 दिन में सुनाई सजा-ए-मौत

 Edited By: Malaika Imam
 Published : Jun 07, 2026 07:06 pm IST,  Updated : Jun 07, 2026 07:13 pm IST

आठ साल की बच्ची के साथ रेप और हत्या के मामले में एक दंपति को मौत की सजा सुनाई है। बांग्लादेश के इतिहास में किसी भी हत्या के मुकदमे का सबसे तेजी से होने वाला निपटारा करार दिया है।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो Image Source : PEXELS.COM

बांग्लादेश की एक अदालत ने रविवार को 8 साल की मासूम बच्ची के साथ रेप और हत्या के मामले में एक दंपति को मौत की सजा सुनाई है। इस मामले में अदालत ने महज पांच दिनों की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुना दिया, जिसे अभियोजकों ने देश के इतिहास में किसी भी हत्या के मुकदमे का सबसे तेजी से होने वाला निपटारा करार दिया है।

ढाका मेट्रोपॉलिटन बाल उत्पीड़न रोकथाम न्यायाधिकरण ने घटना के मात्र 19 दिनों के भीतर दोषियों को सजा का ऐलान कर दिया। इस जघन्य अपराध ने पूरे बांग्लादेश में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर चिंताओं को एक बार फिर से बढ़ा दिया था।

भारी जुर्माना और संपत्ति नीलामी का आदेश

न्यायाधीश मसरूर सालेकिन ने मामले के मुख्य आरोपी सोहेल राणा और उसकी पत्नी स्वप्ना खातून को फांसी की सजा सुनाते हुए कहा, "दोषियों को फांसी की सजा सुनाई जाती है।" इसके साथ ही, अदालत ने दोषी- सोहेल राणा और उसकी पत्नी स्वप्ना खातून पर क्रमश: 5 लाख टका और 2 लाख टका का जुर्माना भी लगाया।

जुर्माने की राशि पीड़ित परिवार को देने का आदेश

न्यायाधीश ने आदेश दिया कि जुर्माने की राशि पीड़ित परिवार को सौंपी जाएगी। यदि दोषी इस जुर्माने की राशि को अदा करने में विफल रहते हैं, तो उनकी चल और अचल संपत्ति को जब्त कर नीलाम किया जाएगा, ताकि राशि की वसूली की जा सके।

किसी निजी वकील ने नहीं की पैरवी

अभियोजकों के मुताबिक, अदालत में चार्जशीट दाखिल होने के बाद मात्र पांच दिनों के भीतर गवाही और जिरह पूरी कर फैसला सुना दिया गया। इस मामले की गंभीरता और जनता के आक्रोश को देखते हुए कोई भी निजी वकील आरोपी दंपति की पैरवी करने के लिए आगे नहीं आया। इसके बाद अदालत ने उनके प्रतिनिधित्व के लिए एक सरकारी वकील (स्टेट डिफेंस काउंसिल) नियुक्त किया। सरकारी वकील ने राणा के लिए मृत्युदंड के बजाय उम्रकैद और खातून के लिए कम कठोर सजा की गुहार लगाई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।

पीड़ित बच्ची के पिता ने कहा, "मैं इस फैसले से पूरी तरह संतुष्ट हूं और उम्मीद करता हूं कि दोषियों को जल्द से जल्द फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा।"

बांग्लादेशी कानून के तहत, निचली अदालतों की ओर से दी गई मौत की सजा को अमल में लाने से पहले हाई कोर्ट की ओर से फैसले की समीक्षा और पुष्टि किया जाना जरूरी है। अटॉर्नी जनरल रूहूल कुद्दुस काजल ने कहा कि निचली अदालत के रिकॉर्ड मिलते ही उनका कार्यालय त्वरित सुनवाई का अनुरोध करेगा।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस ने बीती 19 मई को ढाका के पल्लबी इलाके में स्थित इस दंपति के अपार्टमेंट से बच्ची का क्षत-विक्षत शव बरामद किया था। जांचकर्ताओं के अनुसार, बच्ची की हत्या उसी दिन की गई थी। हत्या के बाद आरोपी सोहेल राणा ने शव के कई टुकड़े कर दिए और फरार हो गया। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए पत्नी स्वप्ना खातून को अपार्टमेंट से ही गिरफ्तार कर लिया था, जबकि राणा को उसी दिन बाद में नारायणगंज के बाहरी इलाके फतुल्लाह से हिरासत में ले लिया गया था। बाद में राणा ने अदालत के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया था।

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